Saturday, 15 July 2017

राजू की दुनिया - इंग्लिश सीखना है


राजू - सर लगता है मुझे थोड़ी बहुत इंग्लिश सीख लेनी चाहिए|
जेपी - क्यों अब ऐसा क्या हो गया,एकदम से यह ख्याल कहा से आया|
राजू -सर कल तो एकदम भौकाल वाली घटना हो गई मेरे साथ| मरते मरते बचा हु|
जेपी - क्यों ऐसा क्या हो गया|
राजू - आपको तो पता ही है सर  वीकेंड पर मैं टूरिस्ट को दिल्ली दर्शन करवा देता हु, दो पैसे बन जाते है|
जेपी - हाँ, हाँ, तो क्या हुआ
राजू - तो सर कल मुझे फ़ोन आया की जापानी टूरिस्ट है उन्हें दिल्ली दर्शन करवाने है और वापस उन्हें गुडगाँव छोड़ना है| मैं तो खुश हो गया, जापानी टिप अच्छी देते है| मैंने सोच लिया, आज इन जापानियों को खुश कर देना है|
जेपी -  फिर क्या हुआ?
राजू - तो पूरा दिन उन्हें दिल्ली घुमाया, शाम को जब उन्हें गुडगाँव छोड़ रहा था, तो एकदम से उनका बचा बोला, "और तेज", "और तेज". मैंने सोचा गाडी तेज चलाने को बोले रहा है, तो मैंने स्पीड बढ़ा दी| पूरा दिन घुमाया है, कही धीरे चलाने के चक्कर में नाराज हो जाये और टिप भी ना दे|
जेपी - फिर?
राजू - स्पीड बढ़ी ही थी की तभी उसकी बीवी बोले पड़ी, "और तेज", "और तेज"| गाडी १०० पर चल रही थी, पर उसकी बीवी के कहने के बाद मैंने स्पीड १२० तक कर दी|
जेपी - फिर?
राजू - फिर क्या था, पांच मिनट ही हुए थे की जापानी बोल पड़ा, "और तेज", "और तेज"| मैंने सोचा इनके "और तेज", "और तेज" के चक्कर में कही उप्पर ही ना पहुंच जाऊ| जैसे तैसे करके मैंने उन्हें गुडगाँव में उनकी सोसाइटी के गेट पर पहुंचाया? तभी मैंने देखा की जापानी जिस सोसाइटी में रह रहे थे, उस सोसाइटी का नाम "आर्किड सोसाइटी" था, वो  "और तेज", "और तेज" नहीं कह रहे थे, बल्कि अपनाईी सोसाइटी का नाम बता रहे थे|
यह ससुरी इंग्लिश के चक्कर में कल जान चली जाती|
जेपी - मेरी तो इतनी जोर से हसी निकली
राजू - अरे सर आप है रहे है|
जेपी - राजू तुमने  सही कहा था, जान गवाने से तो बेहतर है तुम इंग्लिश सीख ही लो| हां हां |

-JP