Tuesday, 28 April 2015

“द घंटा क्लास”



मुझे बचपन से यही बताया गया की मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से हूँ, जिसका अर्थ यही था की ना हम आमिर है और गरीब, हम कही इन दोनों के बीच में फंसे पड़े है| मुझे भी जैसे बताया गया मैंने मान लिया, कभी प्रशन किया और ही इस बारे कभी सोचा, पर जैसे जैसे बड़ा हुआ समझ आने लगा की मिडिल क्लास का पैसे से इतना लेना देना नहीं जितना की आदर्शो की बड़ी बड़ी बातें करने और सम्मान की रक्षा करने में है| मुझे लगा मिडिल क्लास टेम्पल में लगे उस घंटे की तरह है जो हिलाने पर हिलता तो है पर कुछ देर बाद वही दोबारा पहुंच जाता है, अर्थात मिडिल क्लास की सोच बदलना बड़ा ही मुश्किल है, और इतने सालो से उन्ही आदर्शो के सहारे जीते जीते वह ऐसा हो गया है की आप उसकी सोच हिला तो सकते है पर बदल नहीं सकते| तो मिडिल क्लास को हम कंफ्यूज क्लास या घंटा क्लास भी कह सकते है, जो की अपनी जगह बदलना तो चाहता है पर कर नहीं की कही जो है वह भी खो दे|

चलिए आतिये देखते है मिडिल क्लास के कुछ आदर्श:

) मिडिल क्लास नारी शक्ति की बात करता है, कैंडल जलाने में भी सबसे आगे होता है पर उसी नारी के पैदा होने पर उससे दिक्कत है ( कंफ्यूज क्लास - लड़की तो चाहिए पर पहला लड़का होना चाहिए, दूसरी लड़की चलेगी), उसी नारी के पैदा होने पर उसके माथे पर लकीरे पढ़ जाती है की अब दहेज़ इकठा करना पड़ेगा, जबकि आदर्शो के हिसाब से वह दहेज़ लेता है और ना देता है|

) मिडिल क्लास चोरी करने के उपदेश देता है पर वही किसी सरकारी दफ्तर में में बैठकर घूस मांग रहा होता है|

) मिडिल क्लास सारे वह काम करता है जिसके बारे उससे किसी के सामने बताते हुए शर्म आये (क्यूंकि चोर जबतक पकड़ा जाए चोर नहीं कहलाता), रूल्स हमें सारे तोड़ने है पर हमें उस चादर के पीछे छुपा रहने दो जहा से उसका नाम किसी को पता चलें|

) मिडिल क्लास सपने तोड़ने में माहिर है, गलती से भी अगर उसका बच्चा कुछ अलग सोचे तो उसे उसी वक़्त डांट कर बिठा दिया जाता है (ज्यादा उडो मत) चुपचाप सरकारी नौकरी लो, उसमे काम से काम पेंशन मिलती है| लाइफ सिक्योर रहेगी|

) मिडिल क्लास पूरी तरह फ़्रस्ट्रेटेड है पर जी हुज़ूरी, जी हुज़ूरी करता रहता है, क्यूंकि शायद उससे अपने खुद की काबिलियत पर विश्वास नहीं है|

) जो चाहता है की उसकी बच्ची पढ़े, आगे बढे, उसका नाम रोशन करे, पर शादी उसकी मर्जी से करे| चाहे उसकी बच्ची बड़ी बड़ी मल्टीनेशनल के फ्यूचर डिसिशन लेती हो पर वह अपनी लाइफ के डिसिशन लेने में सक्षम नहीं|

) जो अपने लिए नहीं जीता, उससे बस यही पड़ा रहता है की दुनिया क्या सोचेगी|

) जो पूरी ज़िन्दगी पैसा जोड़ने में लगा देता है की एक दिन इमरजेंसी में काम आएगा, पर जिस दिन उस पैसे की ज़रुरत होती है तो वो शायद हस्पताल भी नहीं पहुंच पाता|

१०) जो एक दिन चल बसेगा, सफ़ेद चादर में लिपटा पड़ा होगा और जिस आदर्शो की बात वह पूरी ज़िन्दगी करता रहा, जाने के बाद उससे कोई याद भी नहीं करेगा|

अंत में मैं तो बस इतना ही कहना चाहता की छोड़ दो यह दिखाना की तुम कितने आदर्शवादी हो, छोड़ दो इस डर में जीना की दुनिया क्या कहेगी, खुलकर जीयोभरने दो अपने बचो को वो उड़ान जिसके वो हकदार है | ६०-७० (60-70) साल जीने आये हुए, उसमे भी इतनी बंदिशों में रहते हो| कभी पूछना अपने से सवाल| क्यों? अगर जवाब मिल पाये तो समझ जाना की कही कुछ गड़बड़ है|


-जतिन्दर