Sunday, 15 June 2014

खुशीआं और बाँट लूँ


आज थोड़ी हँसी और है लूँ
हँसी नसीब वालो को मिलती है
लोग ऐसी भी है जिनपर
रोज गमो की बारिश होती है

आज थोड़ी ज़िन्दगी और जी लूँ
ज़िन्दगी जीना भी एक कला है
लोग ऐसी भी है दुनिया में
जो अनजान है की
ज़िन्दगी कहा शुरू और कहा खत्म होती है

आज थोड़े कदम और चल लूँ
ज़िन्दगी आगे बढ़ने का नाम है
लोग ऐसी भी है
जो चल रहे है
पर अपनी मंजिल से अनजान है

आज लोगो के थोड़े गम और बाँट लूँ
एहसास है मुझे गमो के झेलने का
लोग ऐसी भी है 
जो भीड़ में अकेले है
पर किस्मत वाले है जो ना इस अँधेरे में है

जो करना है आज ही कर लूँ
शायद कल वह पल आये ही ना
आज जो रोकी है हँसी वो कभी
होठों पर आये ही ना
जो देखे है सपने
वह कभी पूरे हो पाये ही ना
एक दिन हो जाएगी यह ज़िन्दगी रुस्वा
चलने से पहले
थोड़ी खुशीआं और बाँट लूँ


                                      --- जे.पी. सिंह