Wednesday, 30 April 2014

भीख मांगती ज़िन्दगी



    ओये! क्या कर रहा है?
गाडी साफ़ कर दूँ साहब?
चाहे पैसा मत देना
पर एक बार आपको खुश कर दू साहब?
नहीं नहीं हाथ मत लगा
दूर हट जा
सब जानता हु तुम्हारी यह बाते
गाडी साफ़ करने के बाद
जो तुम भींख मांगने के लिए
हाथ हो फैलाते
साहब भींख नहीं है यह
अगर दिल खुश हो
तोह मेरे हक़ का दे देना
नहीं तो जब गाडी हो जाए साफ़
आप गाडी आगे ले लेना
बाते बहुत करता है
कुछ काम भी आता है
जल्दी से हाथ चला
मेरा वक़्त खराब जाता है
तभी नजर पड़ी उसके पैरो की तरफ
फटा हुआ था उसका जूता
और जम रही थी सड़क
जैसे हो बर्फ
मैंने पुछा
यह फटा जूता कहा से लाया है
वो बोला
साहब लाया नहीं
ये तो मुझे कूड़े में पाया है
ठण्ड से बचाता है?
साहब ठण्ड बहुत लगती है
पर ये मरने से बचाता है
बातो बातो में मैंने पुछा
ओये स्कूल क्यों नहीं जाता
क्यों नहीं पढ़ लिखकर
अपना भविष्य बनाता
साहब बाप मर गया
माँ बीमार है
उसके दवाई के लिए हाहा कार  है
कुछ कहती नहीं
एक तरफ पड़ी रहती है
जानता हु उसे दर्द बहुत होता है
पर सबकुछ सहती रहती है
एक छोटी बेहन है
दिनभर रोती रहती है
दूध उसे मिलता नहीं
इसलिए पानी पी पी कर
सोती रहती है
अगर स्कूल चला गया
तो माँ बेहन मर जाएगी
मुसीबत तो ये है
उन्हें जलाने के लिए
लकड़ियाँ कहा से आएंगी
अकेला रह जाऊंगा
इस डर से स्कूल नहीं जाता
वार्ना पैसा, गाडी, बंगला
किसे नहीं लुभाता
साहब गाडी हो गई साफ़
अब मैं चलता हूँ
अगर लगे की हक़ की खाता है
तो कल फिर यही मिलता हूँ
सुन यह पैसे ले जा
कल से रोज सफाई कर दियो
और माँ का ध्यान रख
मेहनत करके
उसकी झोली खुशिओं से भर दियो
खुशिओं से भर दियो

                          जे. पी. सिंह