Saturday, 26 October 2013

अभी मैं जिंदा हूँ



अगर सांस ले रहा हूँ
तो अभी मैं जिंदा हूँ
अगर हस रहा हूँ
तो अभी मैं जिंदा हूँ
तो क्या हुआ अगर
अन्दर से टूटा हूँ
अगर तेरे साथ खड़ा हूँ
तो समझ अभी मैं जिंदा हूँ

दुनिया की इस भीड़ से जुदा हूँ
कही अपने आप से मैं खुद ही खफा हूँ
क्या है यह ज़िन्दगी,
क्यों है यह ज़िन्दगी
इन्ही सवालो में मैं तो
उलझा पड़ा हूँ
मगर जब तक है हिम्मत
मैं लड़ता रहूँगा
दिखाता रहूँगा, गुनगुनाता रहूँगा
की अभी मैं जिंदा हूँ

कहीं एक सपनो की दुनिया बसाई हैं
किसी की नहीं यह मेरी लड़ाई हैं
बड़ी मुश्किलों मन मैं यह आग लगाईं हैं
बुझने दूंगा क्यूंकि यह मैंने अपनाई हैं
इसलिए कर रहा हु हिम्मत
बढ़ रहा हूँ आगे
यह दिखाने के लिए
की अभी मैं जिंदा हूँ


  जे.. सिंह