Saturday, 29 December 2012



नींद खुली

आज नींद खुली तो दर्द हुआ
दर्द हुआ कोहराम मचा
जाने वाला चला गया
अब किस बात का तूफ़ान मचा

पहली बार नहीं हुआ यह
फिर क्यों है हा हा कार मचा
कितनो का है बलात्कार हुआ
फिर आज क्यों दिल में उफ्फान मचा

मेरा जीवन है अनमोल
पर तेरे जीवन का क्या मोल
ऐसा यह प्रतीत हुआ
जब उस रात यह घटित हुआ

जाना तो सबको है एक दिन
आज तेरा कल मेरा है दिन
पर जैसा तेरे साथ हुआ
बेइंसाफी सा ही प्रतीत हुआ
हम क्या है और क्या बनना चाहते है
शायद मनुषो के बीच जानवर बढ़ते जा रहे है


   अब उठ गए हो तो खड़े रहो
                        खड़े रहो और डटे रहो
                      यह दो चार दिन का ना हो शॊक
 दिल में होना चाहिए प्रतिशोध
औरतो के बिन यह जीवन संभव नहीं
उम्मीद करता हु की उनकी
इज्जत ना होगी कम कभी|

जे.पी.सिंह